Monday, December 12, 2011

गंगाधर कौल या फैजुल्ला खान भाग-2


नेहरू खान वंश
अयोध्‍या प्रसाद त्रिपाठी
प्रस्‍तुति: डॉ0 संतोष राय
यही कारण है कि जवाहर, इंदिरा, संजय, राजीव आदि सभी के सभी मुगलों और उनके रहन सहन के प्रशंसक रहे हैं। यही कारण है कि मुगल वंशीय इतिहास को दिल्ली में सुरक्षित रखा गया है। मुगलों के नाम पर सड़कें हैं। नेशनल कौंसिल आफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग  यानी एनसीईआरटी मुगलकाल की आज भी प्रशंसक है। प्रसंगवश बता दें कि 1947 के पूर्व की ऐतिहासिक पुस्तकें गुप्त काल को भारत का स्वर्णयुग बताती हैं।
हाल ही में भारत के पूर्व विदेशमंत्री नटवर सिंह ने इंदिरा के मुगलों से संबन्‍ध  पर एक महत्वपूर्ण रहस्योद्घाटन किया है। अपनी पुस्तक प्रोफाइल एंड लेटर्स’, प्रकाशक स्टर्लिगं पब्लिशर्स, एल 10 ग्रीनपार्क एक्सटेंशन, दिल्ली 16, में, जिसका निचोड़ दैनिक हिंदुस्तान टाइम्स संस्करण, नवंबर 16, 1997, में छपा है, श्री नटवर सिंह लिखते हैं कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा सरकारी यात्रा पर 1968 में अफगानिस्तान गई थी। नटवर सिंह भारत के विदेश मंत्रालय के विशेष नियुक्ति के कारण उनके साथ थे। दिन भर के ब्यस्त कार्यक्रम के बाद इंदिरा सायं घूमना चाहती थी। कार में लंबे यात्रा के बाद इंदिरा ने बाबर के कब्र को देखना चाहा। यह वीरान स्थान था। इंदिरा बाबर के कब्र के पास गई। सम्मान में कब्र के सामने कुछ मिनटों तक सिर झुकाया और मौन रही।
याद रखिए! बाबर मुगलवंश का संस्थापक था। यह यात्रा उसके कार्यक्रम में उल्लिखित नहीं थी। अतः अफगान अधिकारियों ने इंदिरा को मना भी किया। इंदिरा फिर भी नहीं मानी। इंदिरा ने नटवर सिंह से कहा कि आज हमने अपने इतिहास को तरोताजा किया है। इसमें संदेह नहीं कि यदि इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री रहती तो अयोध्या के बाबरी मस्जिद कांड में मुलायमसिंह से दसगुना अधिक नरसंहार हुआ होता, उसी प्रकार जिस प्रकार हरमंदर साहिब मंदिर में 1984 में हुआ। याद रखें! गोरक्षा की मांग करने वाले संतों पर 7 नवंबर, 1966 को गोली इसी खूंखार औरत ने चलवाई थी।
इंदिरा का पुत्र राजीव गांधी , यद्यपि भारतीय या विदेशी इतिहास का जानकार नहीं था, तथापि उसे मुगलवंशी होने पर काफी गर्व था। यद्यपि वह कहा करता था कि उसका केाई निजी धर्म नहीं है और उसकी पत्नी कैथोलिक ईसाई है, तथापि वह ब्यवहार में इस्लामी था। 15 अगस्त 1988 को उसने लाल किले के प्राचीर से ललकारा था, ‘‘हमारा प्रयत्न इस देश केा 250 से 300 वर्ष पूर्व के काल की बुलंदियों तक ले जाने के लिए होना चाहिए।’’ यही वह काल था जब जजिया विशेषज्ञ औरंगजेब कत्ल किए गए हिंदुओं के सवा मन यज्ञोपवीत तौलने के बाद ही पानी पीता था और मंदिर तोड़ने में जिसे महारत हासिल थी।
पाठकों! नेहरू वंश से क्या आप को कोई भविष्य की परछाईं नहीं मिलती? यद्यपि ऐसी बातों को पचा पाना कठिन है, फिर भी यह शत प्रतिशत सच है कि इस देश पर 1947 से ही मुसलमानों का राज्य रहा है। हम अंग्रेजों द्वारा ठगे गए और ठगे जा रहे हैं। जिस अंग्रेज को निकालने के लिए आप के पूर्वज पूरे 90 वर्ष तक लड़ते रहे उसी अंग्रेजन सोनिया को आप प्रसन्नता पूर्वक इस देश का प्रधानमंत्री स्वीकार कर रहे हैं! रामराज्य तो आया नहीं रोमराज्य देश की छाती पर बैठा है। यही है आप के प्रजातंत्र की उपलब्धि।
याद रखिए! विश्व की सभी प्राचीन संस्कृतियां मिट गईं। आप अपनी वैदिक संस्कृति को मिटाने के लिए उतावले हैं। वह भी किस लिए? अपना गला कटाने, अपनी बहन बेटियों का बलात्कार कराने और बचे भारत को इस्लामी राज्य बनवाने के लिए! क्या हो गया है इस देश के युवा पीढ़ी को?