Thursday, December 8, 2011

सोनिया और राहुल की डिग्रियां भी फर्जी हैं

जीत भार्गव

प्रस्‍तुति: डॉ0 संतोष राय

बंधुओं,
सोनिया की ही नहीं, राहुल की डिग्री भी फर्जी है. लेकिन मुख्यधारा की सेकुलर मीडिया जानबूझकर खामोश है.

- सोनिया के फर्जीवाड़े बारे में डॉक्टर सुब्रमण्यम स्वामी और मशहूर ब्लोगर श्री सुरेश चिपलूनकर ने काफी अधिकृत और तार्किक ढंग से लिखा है. जो उनकी साईट और ब्लॉग पर उपलब्ध है.

- सोनिया की काली करतूतों की  असलीयत सामने लाने के लिए हमें सुनियोजित तरीके से काम करना होगा:

1. आपने देखा होगा की सेकुलरवाद का वास्ता देकर अधिकाँश बिकाऊ मीडिया सोनिया के साथ खडा रहता है. दरअसल ये मीडिया सेकुलरवादी नहीं बल्कि 'फईवादी' (पाकिस्तानी लोबीइस्ट गुलाम नबी फई से खैरात पानेवाले) हैं. इसमे दिलीप पाडगांवकर, कुलदीप नैयर तो बेनकाब हो चुके हैं. बुर्का दत्त, प्रभु चावला, और राजदीप सरदेसाई की फूहड़ पत्रकारिता भी हमने देख ली है. ऐसे दर्जनों पत्रकार, बुद्धीजीवी, लेखक और साहित्यकार हैं, जो खाड़ी देशों, पाकिस्तान और चर्च से खैरात पाकर हिन्दू, हिन्दी और हिन्दुस्तान को दिन-रात कोसते रहते हैं। इसलिए सबसे पहले इन बिकाऊ और भारत विरोधी मीडियाकर्मियों को बेनकाब, बहिष्कार और विरोध करना होगा।

2. सेकुलर मीडिया को करारा जवाब देने के लिए एक राष्ट्रवादी न्यूज चैनल होना चाहिए। बाबा रामदेव, राष्ट्रवादी लोगों (निवेशक) और संघ को इसमे आगे आना चाहिए।

3. सोनिया/कोंग्रेस को बेनकाब करने के लिए हो सके तो उतनी RTI डालकर खुलासे होने चाहिए।

4. बाबा रामदेव,संघ और अन्ना (अग्निवेश जैसे दलालों को छोड़कर) सहित (कोंग्रेस-सोनिया) की नाक में दम करने वाले हर (व्यक्ति-आन्दोलन) को एकजुट होकर समर्थन दे।

5. अपने दैनिक जीवन में भी दिन में कम से कम (एक-दो-पांच) लोगो से रूबरू वार्ता-चर्चा करते हुए कोंग्रेस के भ्रष्टाचार,महंगाई,सोनिया की निर्दयता आदि के बारे में जगाने का काम करना चाहिए।

6. अपने आस-पास के तमाम कोंग्रेस-सोनिया विरोधी लोगो को वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने में मदद करें। चुनाव के दौरान सक्रीय रहें और निर्धन बस्तियों में दारु के साथ नोट बाँटनेवाली कोंग्रेस के मंसूबो पे पाने फेरें।

7. यह समूह सही दिशा में काम कर रहा है. ऐसे प्रयासों को समर्थन दे
बाकी मन में विश्वास रखें, परिवर्तन जरूर होगा। सोनिया के साथ सत्ता के दलाल है,लेकिन श्री रामदेव के साथ भारत माँ के लाल हैं। और भारत माँ के असली लाल को ही संघर्ष करना पड़ता है। भगत सिंह, राजगुरु,सावरकर का उदाहरण सामने है।

सत्ता के दलाल सत्ता की अय्याशियां करते हैं...नेहरू,सोनिया, दिग्‍गी का उदाहरण भी सामने हैं, लेकिन याद रखियेगा। आनेवाली पीढियां राणाप्रताप को ही नमन करती हैं, किसी मानसिंह या जयचंद को नहीं।
आभार सह ..
जीत भार्गव.
http://secular-drama.blogspot.com/